-क्षत्रिय शरारती नहीं हो सकते,
-क्षत्रिय (क्रूर) निर्दयी नहीं हो सकते,
-क्षत्रिय प्रेमपूर्ण और दयालु हो सकते हैं,
-जब तक क्षत्रिय दान, धर्म और कर्म में विश्वास रखने वाला है, दानेश्वरी स्थिति के अनुसार नहीं हो सकता है लेकिन वह पाखंडी नहीं हो सकता है,
-क्षत्रिय देशद्रोही नहीं हो सकता,
-क्षत्रिय गलती कर सकते हैं लेकिन गलती बार-बार नहीं दोहरा सकते,
-क्षत्रिय खिलाड़ी की जरूरत हो सकती है लेकिन खेल के मैदान में नहीं खेल सकते समाज,
- क्षत्रिय शिव-शक्ति नो उपासक होय ने होय,
-क्षत्रिय झूठ नहीं हो सकता,
-क्षत्रिय स्वार्थी नहीं हो सकते, अपने स्वार्थ के लिए किसी को गड्ढे में नहीं फेंक सकते,
-क्षत्रिय चतुर, चतुर, बुद्धिमान और मजबूत मनोबल वाला होता है लेकिन इन सबके बावजूद वह पाखंडी नहीं हो सकता।
साथ ही जो लोग समय को समझते हैं और चलते हैं, (जैसे राजा हरिश्चंद्र, राजा विक्रम)
-क्षत्रिय कुलीन, बलवान, करुणामय, साहसी, साहसी, विचारशील, धार्मिक (आध्यात्मिक) ही चाहिए
परंतु
- उसके पास इतने गुण होते हुए भी जोशीला होना चाहिए..
क्योंकि यही क्षत्रिय जीवन का कर्तव्य है...
और इसलिए दुनिया क्षत्रिय में आस्था और भय दोनों देखती है....
जय भवानी
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